आम कार्यकर्ता से CM तक का सफर, जन्मदिन पर जानिए नायब सिंह सैनी कैसे बने हरियाणा के मुखिया

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 56 साल के हो गए है। आज उनका जन्मदिन है। उनके बर्थडे पर पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है। पीएम मोदी ने उन्हें एक्स पर बधाई देते हुए लिखा है कि जनसेवा में समर्पित हरियाणा के ऊर्जावान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। उनका जमीनी अनुभव राज्य के मेरे परिवारजनों के लिए बहुत कल्याणकारी सिद्ध हो रहा है। उनके नेतृत्व में हमारा यह प्रिय प्रदेश विकास की राह पर निरंतर अग्रसर है। ईश्वर उन्हें स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन प्रदान करे।

आम कार्यकर्ता से सीएम तक का सफर
एक साधारण कार्यकर्ता से हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने तक नायब सिंह सैनी की राजनीतिक यात्रा अपने आप में अलग पहचान रखती है। अपनी सादगी, मेहनत और जमीनी जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले नायब सिंह सैनी ने अब तक जिस भी जिम्मेदारी को संभाला, उसमें खुद को साबित किया है। आज जब वे अपने जीवन के 56वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तो आज हम उनके जीवन के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

कैसे हुई राजनीति में एंट्री
25 जनवरी 1970 को जन्मे नायब सिंह सैनी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। उनके परिवार की जड़ें कुरुक्षेत्र जिले से जुड़ी रही हैं। प्रारंभिक जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते थे। उन्होंने अंबाला स्थित एक सेंटर से कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जिससे तकनीकी समझ भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनी। राजनीति में उनके पहले कदम बीजेपी के माध्यम से पड़े, जहां उन्होंने संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया। सैनी को किसान मोर्चा में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई, जहां उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों को नजदीक से समझा और संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई। इसके साथ ही वे पार्टी के चुनाव अभियानों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। उनकी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए।

पहले चुनाव में मिली हार
2009 में उन्होंने नारायणगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे। उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम 2014 के विधानसभा चुनाव में सामने आया, जब उन्होंने नारायणगढ़ सीट से 24 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। इसी चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। पहली बार विधायक बनने के साथ ही नायब सिंह सैनी को राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्री रहते हुए भी उन्होंने संगठन से अपना जुड़ाव बनाए रखा और पार्टी कार्यालयों के माध्यम से जमीनी कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में रहे। वे राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाकर काम करते रहे, जिससे उनकी छवि एक भरोसेमंद नेता के रूप में मजबूत हुई।

2019 में लड़ा लोकसभा चुनाव, फिर कैसे बने सीएम
उनका मंत्री पद का कार्यकाल पूरा भी नहीं हुआ था कि 2019 में पार्टी ने उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। सांसद के रूप में उनका कार्यकाल प्रभावशाली रहा और संसद में उनकी सक्रियता की सराहना पार्टी नेतृत्व ने खुलकर की। यही वजह रही कि बाद में उन्हें प्रदेश संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी हाईकमान और विधायकों के समर्थन से नायब सिंह सैनी को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।

नायब सरकार के बड़े फैसले

  • हरियाणा सरकार ने \’लाडो लक्ष्मी योजना\’ लागू करने का फैसला लिया। इस योजना के तहत 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये मिल रहे हैं।
  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही 25 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया था। ये भर्ती विधानसभा चुनाव से पहले हुए थे, लेकिन इलेक्शन के चलते चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी।
  • हरियाणा देश का पहला राज्य है, जो 24 फसलों को एमएसपी पर खरीद रहा है। नायब सिंह सैनी ने फिर से सीएम बनने के बाद से इसका नोटिफिकेशन भी जारी करवा दिया था।
  • हरियाणा में बीजेपी की तीसरी बार लगातार सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में सीएम सैनी ने प्रदेशभर के सभी अस्पतालों में फ्री डायलिसिस की सुविधा देने का फैसला किया था। नायब सरकार के इस फैसले के बाद से हरियाणा फ्री डायलिसिस की सुविधा देने वाला पहला राज्य बन गया।
  • हरियाणा के कर्माचरियों के लिए ग्रेज्युटी को 25 प्रतिशत बढ़ा दिया है। इससे अब कर्मचारियों को 25 लाख तक ग्रेच्युटी मिल सकती है, जो पहले 20 लाख थी।

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